October 28, 2026 2:19 am

नेपाल बाढ़ त्रासदी: 9वे दिन त्रिशूली टनल से जिंदा निकले दो कर्मचारी, सैकड़ों के अब भी फंसे होने की आशंका

नेपाल। भोटीकोशी और त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के नौवें दिन राहत और बचाव अभियान के बीच एक उम्मीद भरी खबर सामने आई है। त्रिशूली-3A टनल में पिछले कई दिनों से फंसे दो नेपाली कर्मचारियों को नेपाली सेना और बचाव दल ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।

बचाए गए कर्मचारियों की पहचान संजय शाह और कबीर महारजन के रूप में बताई जा रही है। दोनों के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद राहत शिविर और बचाव दलों में खुशी का माहौल देखने को मिला। इस सफलता के बाद अब उन अन्य कर्मचारियों को लेकर भी उम्मीद बढ़ी है, जो विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं और सुरंगों में फंसे होने की आशंका के बीच लगातार बचाव का इंतजार कर रहे हैं।

नेपाली अधिकारियों के अनुमान के मुताबिक, अलग-अलग जलविद्युत परियोजनाओं और टनलों में अभी भी बड़ी संख्या में कर्मचारी फंसे हो सकते हैं। कुछ रिपोर्टों में यह संख्या करीब 900 बताई जा रही है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों से मिलने वाली जानकारी के कारण वास्तविक संख्या में बदलाव संभव है।

भोटीकोशी और त्रिशूली नदी में बाढ़ से भारी तबाही

बताया जा रहा है कि ग्लेशियर टूटने और पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बढ़े जलप्रवाह के बाद भोटीकोशी और त्रिशूली नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ गया। देखते ही देखते कई क्षेत्रों में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया और लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा।

बाढ़ की चपेट में आने से कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं। बड़ी संख्या में लोग बेघर हुए हैं, जबकि कई परिवार अभी भी अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं।

नेपाली सरकार और स्थानीय प्रशासन से जुड़े दावों के अनुसार, इस आपदा में अब तक 1287 लोगों की मौत, 13,093 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और 5,083 लोगों के लापता होने की बात सामने आई है। लापता लोगों में सैकड़ों विदेशी नागरिकों के शामिल होने की भी आशंका जताई जा रही है।

Rescuers carry a victim of flash flooding to safety along the Trishuli River in Nepal’s Nuwakot district, Wednesday, Aug. 26, 2026. (AP Photo/Niranjan Shrestha)

लापता विदेशी नागरिकों को लेकर चिंता

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लापता लोगों में 583 से अधिक विदेशी नागरिक भी शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें भारतीय नागरिकों की संख्या अधिक होने की आशंका भी जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि और विस्तृत पहचान प्रक्रिया अभी जारी बताई जा रही है।

पहले धरती डोली, फिर टूटा ग्लेशियर

स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, आपदा से पहले कुछ मिनटों तक क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि महसूस की गई थी। इसके बाद पहाड़ी क्षेत्रों में ग्लेशियर और बर्फीले हिस्सों के टूटने की घटनाएं सामने आईं, जिसके बाद नदियों में अचानक जलस्तर बढ़ गया।

कुछ ही मिनटों में हालात इतने भयावह हो गए कि लोग अपने घर, दुकानें और सामान छोड़कर जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागने लगे।

A girl sits in a building damaged by the recent flash floods, in Dhading District, Nepal, Sunday, Aug. 30, 2026. (AP Photo/Niranjan Shrestha)

भारत ने नेपाल को दिया सहयोग का भरोसा

इस आपदा की घड़ी में भारत ने नेपाल के साथ सहयोग बनाए रखने की बात कही है। राहत, बचाव और जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के लिए दोनों देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय की बात सामने आई है।

फिलहाल नेपाली सेना, स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों में लगातार बचाव अभियान चला रही हैं। त्रिशूली-3A टनल से दो कर्मचारियों का जीवित बाहर निकलना राहत अभियान के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

A drone view of the aftermath of flash flooding along the Trishuli river amidst fresh water surge warning in the Trishuli Bazaar area of Nuwakot district, Nepal, Sunday, Aug. 30, 2026. (AP Photo/Rajesh Kumar Singh)

नेपाल में जारी इस आपदा और राहत अभियान से जुड़ी हर बड़ी अपडेट के लिए बने रहिए अक्षर भारत LIVE के साथ।

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