गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। अरविन्द श्रीवास्तव ।
गोरखपुर में अवैध डग्गामार वाहनों के संचालन पर प्रभावी रोक लगाने की मांग को लेकर यूपी रोडवेज एम्पलाइज यूनियन के कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। यूनियन के प्रदेश नेतृत्व के आह्वान पर गोरखपुर क्षेत्र के विभिन्न डिपो और शाखाओं के अध्यक्षों, मंत्रियों तथा कर्मचारियों ने एकजुट होकर अपनी मांग उठाई। प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सहायक प्रबंधक कार्यालय को सौंपा गया।

कर्मचारियों ने मांग की कि परिवहन निगम के बस स्टेशनों के आसपास और विभिन्न मार्गों पर संचालित हो रहे कथित अवैध डग्गामार वाहनों पर प्रभावी अंकुश लगाया जाए। उनका कहना है कि इस तरह के संचालन से एक ओर परिवहन निगम के राजस्व पर असर पड़ता है, वहीं यात्रियों की सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था से जुड़े सवाल भी उठते हैं।
27 और 28 अक्टूबर को रूट मार्च की चेतावनी
यूनियन ने स्पष्ट किया कि यदि अवैध वाहन संचालन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। कर्मचारियों के मुताबिक, 27 और 28 अक्टूबर को गोरखपुर डिपो और राप्तीनगर डिपो में रूट मार्च आयोजित कर जिलाधिकारी और मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
कर्मचारियों ने राज्य सरकार से मांग की कि परिवहन निगम के हितों की रक्षा के लिए अवैध संचालन के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
क्षेत्रीय नेतृत्व में लामबंद हुए कर्मचारी
प्रदर्शन का नेतृत्व यूपी रोडवेज एम्पलाइज यूनियन के क्षेत्रीय अध्यक्ष ने किया। यूनियन के मंत्री राजेश पांडेय सहित कई पदाधिकारी और कर्मचारी इसमें शामिल हुए।

इस अवसर पर अजय पांडेय, अमरमणि पांडेय, संजय पासवान, जयचंद पासवान, नूरुल हसन, प्रियांशु उपाध्यक्ष, रामनारायण सिंह, महेंद्र सिंह, सुनील यादव, साधना प्रजापति, रीना पासवान, पुष्पा पासवान, विनय कुमार, दिनेश दुबे, प्रत्यांश मिश्रा और मनोज चंद्रा सहित सैकड़ों कर्मचारियों की उपस्थिति बताई गई।
परिवहन निगम के राजस्व पर असर का आरोप
यूनियन के कर्मचारियों का कहना है कि परिवहन निगम के बस स्टेशनों के आसपास और गोरखपुर से गाजियाबाद तक डग्गामार वाहनों का संचालन चिंता का विषय है। उनके अनुसार, इससे निगम के राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है। कर्मचारियों ने सरकार से इस मामले में ठोस कदम उठाने की मांग की है।
अब देखना होगा कि कर्मचारियों की मांगों पर संबंधित अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं और प्रस्तावित रूट मार्च के बाद आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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