वाराणसी। अरविन्द श्रीवास्तव | उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी में रविवार को भारतीय वायुसेना के भव्य एरियल डिस्प्ले ‘विंग्स ओवर गंगा’ का आयोजन किया गया। नमो घाट पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। भारतीय वायुसेना के 94वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस एयर शो में लड़ाकू विमानों और हेलीकॉप्टरों ने अपनी क्षमताओं का शानदार प्रदर्शन किया।अरविन्द श्रीवास्तव

राफेल, सुखोई और तेजस ने दिखाया दम
गंगा के ऊपर आयोजित इस हवाई प्रदर्शन में राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान तेजस और प्रचंड लड़ाकू हेलीकॉप्टर सहित विभिन्न विमानों ने हिस्सा लिया। विमानों की सटीक उड़ान, रोमांचक हवाई करतब और शानदार फॉर्मेशन ने दर्शकों को आकर्षित किया।

भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम ने भी अपने कौशल का प्रदर्शन किया। विमानों के समन्वित प्रदर्शन ने वायुसेना की पेशेवर दक्षता, अनुशासन और परिचालन क्षमता की झलक पेश की।
पीएम मोदी के साथ कई प्रमुख हस्तियां रहीं मौजूद
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौजूद रहे। ‘विंग्स ओवर गंगा’ के माध्यम से भारतीय वायुसेना के शौर्य, आधुनिक सैन्य क्षमताओं और देश की सुरक्षा के प्रति समर्पण को प्रदर्शित किया गया।

वाराणसी में नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन
एयर शो से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी में अरविंद लिमिटेड की नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन भी किया। इस इकाई का उद्देश्य भारत के कपड़ा एवं परिधान उद्योग को मजबूत करना और क्षेत्र में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देना है।

इस परियोजना में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष जोर दिया गया है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने और वाराणसी में निर्मित परिधानों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
औद्योगिक विकास और राष्ट्रीय गौरव का संगम
प्रधानमंत्री के वाराणसी दौरे में एक ओर नई विनिर्माण इकाई के माध्यम से रोजगार और औद्योगिक विकास को प्रोत्साहन देने का प्रयास दिखाई दिया, वहीं दूसरी ओर भारतीय वायुसेना के एयर शो ने देश की रक्षा क्षमता और सैन्य कौशल को प्रदर्शित किया।

गंगा के ऐतिहासिक घाटों की पृष्ठभूमि में आयोजित इस कार्यक्रम ने वाराणसी को राष्ट्रीय गौरव और आधुनिक भारत की सैन्य क्षमताओं के एक विशेष आयोजन का केंद्र बना दिया।










