गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। अरविन्द श्रीवास्तव । शक्ति की आराधना, वैदिक मंत्रों की गूंज और लोककल्याण की कामना। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। वहीं, विजयादशमी से पहले उन्होंने लोगों से त्योहार को पूरे उत्साह के साथ मनाने और सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की अपील की है।

महानिशा पूजन और हवन से की लोककल्याण की कामना
गोरखनाथ मंदिर में महाष्टमी की रात गोरक्षपीठ की विशिष्ट परंपरा के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मां आदिशक्ति के आठवें स्वरूप मां महागौरी की आराधना की। इसके बाद शक्तिपीठ में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच महानिशा पूजन और हवन संपन्न हुआ।

दो घंटे से अधिक समय तक चले इस अनुष्ठान में विभिन्न देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन किया गया। दुर्गासप्तशती के पाठ, हवन और आरती के साथ धार्मिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के सुखमय जीवन और समस्त जगत के कल्याण की प्रार्थना की।
महानवमी पर कन्या पूजन
गोरक्षपीठ की परंपरा के अनुरूप महानवमी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नौ कन्याओं का पूजन किया। कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में मानकर उनके चरण पखारे गए और तिलक लगाकर पूजन किया गया। उन्हें भोजन, प्रसाद, वस्त्र और दक्षिणा भी भेंट की गई।


यह अनुष्ठान नवरात्र में नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
विजयादशमी पर सीएम योगी की अपील
धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों से विशेष अपील की। उन्होंने कहा कि त्योहार को उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाए, लेकिन सुरक्षा और अनुशासन की अनदेखी न हो।

मुख्यमंत्री के अनुसार, विजयादशमी अधर्म, असत्य और अन्याय पर धर्म, सत्य और न्याय की विजय का प्रतीक है। प्रदेश में रामलीलाओं, रावण दहन और अन्य आयोजनों को देखते हुए सुरक्षा तथा यातायात प्रबंधन के इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने उत्सव के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करने और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने पर जोर दिया।
विजयादशमी पर गोरखपुर में निकलेगी पारंपरिक शोभायात्रा
गोरखनाथ मंदिर की विजयादशमी परंपरा का एक प्रमुख आकर्षण गोरक्षपीठाधीश्वर की शोभायात्रा है। 20 अक्टूबर को प्रस्तावित इस आयोजन में धार्मिक परंपराओं के साथ सामाजिक समरसता का संदेश भी देखने को मिलेगा। परंपरा के अनुसार शोभायात्रा मानसरोवर मंदिर और रामलीला मैदान तक पहुंचेगी, जहां पूजा-अर्चना और भगवान श्रीराम के राजतिलक का कार्यक्रम होगा।

गोरक्षपीठ की विजयादशमी परंपरा में विभिन्न समुदायों की सहभागिता भी विशेष महत्व रखती है। यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ आपसी सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश देता है।
अक्षर भारत लाइव का सवाल: विजयादशमी हमें बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है। आपके अनुसार आज के समाज में इस पर्व का सबसे बड़ा संदेश क्या है—सत्य, न्याय, सुरक्षा या सामाजिक सद्भाव? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।
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