गोरखपुर | अरविन्द श्रीवास्तव | गोरखपुर में विजयादशमी के अवसर पर मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में पारंपरिक विजय शोभायात्रा निकाली गई। गोरखनाथ मंदिर से मानसरोवर रामलीला मैदान तक निकली इस ऐतिहासिक शोभायात्रा में आस्था, परंपरा और सामाजिक सहभागिता का अनूठा दृश्य देखने को मिला। शोभायात्रा का मुस्लिम, बुनकर और सिंधी समाज के लोगों ने पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर स्वागत किया।

धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक समरसता का संदेश
गोरखनाथ मंदिर से शोभायात्रा निकलने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु गोरखनाथ की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद पारंपरिक वेशभूषा में सजे विजयरथ पर सवार होकर उन्होंने शोभायात्रा का नेतृत्व किया। रास्ते में नागफनी, तुरही, नगाड़ों और डमरू की गूंज के बीच श्रद्धालुओं ने उत्साह के साथ यात्रा का स्वागत किया।

इस आयोजन की खास बात रही कि मुस्लिम और बुनकर समाज के लोगों ने भी पुष्पवर्षा कर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के पूर्व अध्यक्ष चौधरी कैफुलवरा सहित विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधियों ने स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया और नवरात्र के अनुष्ठान का प्रसाद भी वितरित किया।
योगी बोले— सनातन की छाया में सभी को सुरक्षा और समृद्धि
विजयादशमी के अवसर पर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुनिया के विभिन्न समुदायों और विचारधाराओं के बीच संघर्ष का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया में मुस्लिम-मुस्लिम, कम्युनिस्ट-कम्युनिस्ट और क्रिश्चियन-क्रिश्चियन आपस में लड़ रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने इसके विपरीत भारत की सांस्कृतिक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा—
“अकेले भारत सनातन की छाया में हर जाति, हर संप्रदाय, हर मत, हर मजहब को सुरक्षा भी दे रहा है, उसको समृद्धि के पथ पर भी बिना भेदभाव के अग्रसर कर रहा है।”

मुख्यमंत्री के इस वक्तव्य का मुख्य संदेश भारत की सांस्कृतिक परंपरा, सामाजिक एकता और सभी समुदायों की सुरक्षा एवं समृद्धि से जुड़ा रहा।
भगवान शिव की आराधना से श्रीराम के राजतिलक तक
शोभायात्रा मानसरोवर मंदिर पहुंची, जहां मुख्यमंत्री ने भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया। इसके बाद मानसरोवर रामलीला मैदान में भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की पूजा-अर्चना और आरती की गई। मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम का राजतिलक भी किया। उन्होंने रामलीला की परंपरा को समाज में मर्यादा, आदर्श और सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला माध्यम बताया।

गोरखपुर की यह विजयादशमी शोभायात्रा एक ओर नाथपंथ की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा को सामने लाती है, तो दूसरी ओर विभिन्न समुदायों की भागीदारी के कारण सामाजिक सहभागिता की तस्वीर भी प्रस्तुत करती है।
अक्षर भारत लाइव के लिए निष्कर्ष: विजयादशमी का यह आयोजन आस्था, परंपरा और सामाजिक सहभागिता के संगम के रूप में सामने आया, जहां धार्मिक उत्सव के बीच विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे के प्रति सम्मान और स्वागत का भाव प्रदर्शित किया।










