October 28, 2026 2:17 am

चित्रकूट में मंदाकिनी का रौद्र रूप, 2026 की बाढ़ ने ताजा की 2003 की भयावह यादें

 अरविन्द श्रीवास्तव (कर्वी/चित्रकूट) :  इस बार मानसून की बारिश ने उत्तर भारत के कई शहरों में जनजीवन को प्रभावित किया, लेकिन उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर बसे चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान ने हालात को बेहद गंभीर बना दिया। बाढ़ का पानी कई इलाकों और प्रमुख मार्गों तक पहुंच गया, जिसके चलते आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

चित्रकूट की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बेड़ी पुलिया से रामघाट की ओर जाने वाली मुख्य सड़क और जानकी कुंड की ओर जाने वाले मार्ग पर कई स्थानों पर नावों का सहारा लेना पड़ा। जिन रास्तों पर सामान्य दिनों में वाहनों की आवाजाही रहती है, वहां पानी का तेज बहाव दिखाई दिया।

2003 की बाढ़ से भी भयावह बताया जा रहा इस बार का मंजर

चित्रकूट में वर्ष 2003 में आई भीषण बाढ़ की यादें आज भी लोगों के जेहन में हैं। स्थानीय स्तर पर एक संस्था के सुरक्षा गार्ड ने बताया कि उस समय आई विकराल बाढ़ में पानी में डूबने से एक हाथी की मौत तक हो गई थी। उनका कहना है कि 2026 में मंदाकिनी का उफान 2003 की बाढ़ से भी अधिक विकराल नजर आया।

हालांकि इस बार बड़ी जनहानि नहीं हुई, लेकिन बाढ़ के कारण लोगों में भय और असुरक्षा का माहौल बना रहा। कई इलाकों में लोगों को आवागमन और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बाढ़ के साथ उठे तैयारी और व्यवस्था पर सवाल

चित्रकूट में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। हर वर्ष मानसून के दौरान मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा होता है। ऐसे में इस बार की बाढ़ ने एक बार फिर नदी और जल निकासी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

मंदाकिनी नदी के सुंदरीकरण और बाढ़ से बचाव का मुद्दा पहले भी उठता रहा है। वर्ष 2022 में संसद में भी मंदाकिनी नदी से जुड़े विषयों और बाढ़ से बचाव को लेकर चर्चा हुई थी।

इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या नदी-नालों की नियमित सफाई, जल निकासी व्यवस्था और बाढ़ से पहले की तैयारियों पर पर्याप्त ध्यान दिया गया?

नदी संरक्षण भी बड़ी चुनौती

मंदाकिनी केवल चित्रकूट की जीवनरेखा ही नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण नदी है। रामघाट और जानकी कुंड जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों से इसका गहरा संबंध है।

ऐसे में नदी को प्रदूषण और अतिक्रमण से बचाने की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो जाती है। स्थानीय लोगों का मानना है कि नदी संरक्षण को लेकर लगातार जागरूकता और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है, ताकि आने वाले वर्षों में बाढ़ का खतरा कम किया जा सके।

2026 की बाढ़ छोड़ गई बड़ा संदेश

इस बार मंदाकिनी का उफान केवल चित्रकूट के लिए एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है। बाढ़ के बाद अब जरूरत इस बात की है कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह, जल निकासी व्यवस्था, नदी-नालों की सफाई और बाढ़ नियंत्रण की तैयारियों पर गंभीरता से काम किया जाए।

चित्रकूट के लोग अब तक वर्ष 2003 की बाढ़ को याद करते थे, लेकिन 2026 की बाढ़ की तस्वीरें और मंजर भी उनकी स्मृतियों में लंबे समय तक दर्ज रहेंगे।

अब देखने वाली बात यह होगी कि इस बाढ़ के बाद प्रशासन और जनप्रतिनिधि इससे कोई स्थायी सबक लेते हैं या फिर अगले मानसून तक यह मुद्दा एक बार फिर पीछे छूट जाता है।

अक्षर भारत लाइव के लिए विशेष रिपोर्ट।

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