12 दिनों से दो एंबुलेंस के जरिए बाढ़ प्रभावितों को उपचार, मुफ्त दवाओं के साथ राहत सामग्री भी वितरित

अरविन्द श्रीवास्तव (चित्रकूट/कर्वी) :
चित्रकूट। भारतीय संस्कृति में सेवा और परोपकार की परंपरा सदियों पुरानी रही है। साधु-संतों और महापुरुषों की इस धरती पर जरूरतमंदों की मदद को हमेशा मानवता का सबसे बड़ा धर्म माना गया है। आज जब भौतिक जीवन में इंसान अपनी जरूरतों और सुख-सुविधाओं के पीछे भाग रहा है, ऐसे समय में दीन-दुखियों और असहाय लोगों की सेवा निश्चित रूप से मानवता की एक बड़ी मिसाल है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश की विंध्य पर्वतमाला से जुड़े क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के उफान के कारण कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं। स्थानीय निवासियों, बुजुर्गों और व्यापारियों को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

बाढ़ प्रभावितों के बीच पहुंची चिकित्सा सुविधा
मुश्किल की इस घड़ी में श्री सद्गुरु सेवा ट्रस्ट की ओर से राहत और सेवा कार्य लगातार जारी हैं। ट्रस्ट पिछले करीब 12 दिनों से दो एंबुलेंस के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रहा है।
ट्रस्ट की ओर से बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों का उपचार किया गया और उन्हें मुफ्त दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
राहत सामग्री के साथ बच्चों की पढ़ाई का भी रखा ध्यान
सेवा कार्य केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं रहा। बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच कपड़े और अनाज वितरित किए गए। स्कूली बच्चों के लिए ड्रेस और पठन-पाठन से जुड़ी आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
संस्था की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नेत्र परीक्षण शिविर का आयोजन भी किया गया, ताकि जरूरतमंद लोगों को आंखों की जांच और आवश्यक चिकित्सकीय सलाह मिल सके।

विद्यार्थियों की तीन महीने की फीस माफ
बाढ़ की वजह से प्रभावित परिवारों और विद्यार्थियों की मुश्किलों को देखते हुए संस्थान से शिक्षा ग्रहण कर रहे कई विद्यार्थियों की तीन महीने की फीस माफ करने की घोषणा भी की गई।
कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं- डॉ. इंलेश जैन
संस्थान के ट्रस्टी निदेशक डॉ. इंलेश जैन ने बताया कि संस्था बाढ़ पीड़ितों के बीच जाकर उनके साथ खड़ी है और उनके दुख-दर्द को कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में जरूरतमंद लोगों तक चिकित्सा, दवाएं और आवश्यक राहत सामग्री पहुंचाना संस्था की प्राथमिकता है।
बाढ़ की चुनौती के बीच राहत और सेवा के इन प्रयासों ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि संकट के समय इंसानियत और संवेदना सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
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