कोर्ट ने माफ़ नहीं किया मुस्कान और प्रेमी साहिल को ,नीले ड्रम वाले कांड में
मेरठ, उत्तर प्रदेश।
एक मां की आंखों में बेटे को खोने का दर्द… एक परिवार के दिल में इंसाफ की उम्मीद… और अदालत के कठघरे में एक ऐसा मामला, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया।
मेरठ के बहुचर्चित नीले ड्रम वाले सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने 14 अक्टूबर 2026 को बड़ा फैसला सुनाया है। सौरभ की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई गई है। करीब 13 महीने चली सुनवाई, 126 अदालती कार्यवाहियों और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों के बाद यह फैसला आया है। <Cite refs={[“turn726389search1″,”turn726389search5”]}/>
लेकिन इस फैसले तक पहुंचने वाली कहानी जितनी दर्दनाक है, उतनी ही विचलित करने वाली भी।
एक हत्या, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया
सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी से जुड़े थे। फरवरी 2025 में वह लंदन से मेरठ लौटे थे, ताकि अपने परिवार के साथ समय बिता सकें। लेकिन कुछ ही दिनों बाद उनकी जिंदगी का दर्दनाक अंत हो गया।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, मार्च 2025 में सौरभ की हत्या की गई। इसके बाद उनके शव के टुकड़े करके उन्हें सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपा दिया गया। जब इस वारदात का खुलासा हुआ, तो घटना की भयावहता ने लोगों को स्तब्ध कर दिया।
जिस घर में कभी परिवार की जिंदगी आगे बढ़ने के सपने रहे होंगे, उसी घर से जुड़ी इस घटना ने रिश्तों में भरोसे और इंसानियत को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

126 सुनवाइयां, 22 गवाह और फिर अदालत का फैसला
इस मामले में पुलिस की जांच के बाद न्यायिक प्रक्रिया शुरू हुई। अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने गवाह और साक्ष्य पेश किए। 30 सितंबर 2026 को अदालत ने मुस्कान और साहिल को हत्या तथा सबूत मिटाने के मामले में दोषी ठहराया था। इसके बाद 14 अक्टूबर को सजा सुनाई गई।
अदालत ने दोनों को मृत्युदंड दिया। सजा सुनाए जाने के दौरान मुस्कान के रो पड़ने की खबर भी सामने आई है।
लेकिन इस मामले का सबसे बड़ा भावनात्मक पहलू यह है कि किसी परिवार के लिए अपने बेटे को खोने का दर्द किसी भी फैसले से पूरी तरह मिटाया नहीं जा सकता। न्याय का फैसला एक महत्वपूर्ण पड़ाव जरूर है, लेकिन खोई हुई जिंदगी वापस नहीं लाई जा सकती।

सौरभ की मां का दर्द, समाज के लिए एक सवाल
इस घटना ने समाज के सामने एक गंभीर सवाल रखा है—अगर रिश्तों में दूरियां बढ़ जाएं, अगर साथ रहना मुश्किल हो जाए, तो क्या हिंसा कभी उसका समाधान हो सकती है?
किसी रिश्ते को खत्म करने के रास्ते कानून और संवाद के जरिए तलाशे जा सकते हैं, लेकिन किसी की जिंदगी छीन लेने का अधिकार किसी को नहीं है।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं, बल्कि परिवार, भरोसे और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा एक गहरा घाव भी है।

आगे क्या होगा?
अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा के बाद भी कानूनी प्रक्रिया का महत्व बना रहेगा। मृत्युदंड की पुष्टि हाईकोर्ट द्वारा की जानी आवश्यक होती है और दोषियों को कानून के तहत अपील का अधिकार प्राप्त है।
इसलिए यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है, जबकि आगे की कानूनी कार्यवाही पर भी नजर बनी रहेगी।
सौरभ राजपूत हत्याकांड ने एक बार फिर याद दिलाया है कि अपराध कितना भी सनसनीखेज क्यों न हो, न्याय का रास्ता सबूतों और कानून से होकर ही गुजरता है।
मेरठ के इस चर्चित मामले में अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी हैं।
ऐसी ही बड़ी खबरों की सच्चाई, उनका पूरा घटनाक्रम और जनहित से जुड़े सवालों के लिए जुड़े रहिए अक्षर भारत लाइव के साथ।
जहाँ शब्द नहीं, अनुभूति बोलती है।












