लखनऊ। अरविन्द श्रीवास्तव । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सरकारी सेवा बांड के तहत कार्यरत एमबीबीएस डॉक्टरों ने वेतन विसंगति के विरोध में प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने समान काम के लिए समान वेतन की मांग उठाते हुए अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार की घोषणा की है। प्रदर्शनकारी चिकित्सकों का कहना है कि समान शैक्षणिक योग्यता और लगभग समान जिम्मेदारियों के बावजूद अलग-अलग स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात डॉक्टरों के वेतन में बड़ा अंतर है।

वेतन में ₹50,000 तक के अंतर का दावा
प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के मुताबिक, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में तैनात बॉन्डेड चिकित्सकों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) में सेवाएं दे रहे डॉक्टरों के वेतन में काफी अंतर है। डॉक्टरों ने इस अंतर को लगभग ₹50,000 तक बताते हुए सरकार से वेतनमान की विसंगति दूर करने की मांग की है।

चिकित्सकों का तर्क है कि जब उनकी डिग्री एमबीबीएस है और वे सरकारी सेवा बांड की शर्तों के तहत कार्य कर रहे हैं, तो वेतन निर्धारण में इतना बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए। वे सभी संबंधित बॉन्डेड डॉक्टरों के लिए समान वेतनमान लागू करने की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन के जरिए सरकार तक पहुंचाई आवाज
लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान डॉक्टरों ने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया। चिकित्सकों का कहना है कि वेतन संबंधी समस्या का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने मांग की कि शासन स्तर पर मामले की समीक्षा कर स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

डॉक्टरों की मांगों पर सरकार की ओर से किसी नए अंतिम निर्णय या शासनादेश की पुष्टि होने पर ही उसके बारे में निश्चित रूप से कहा जा सकेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
इस आंदोलन को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव की चर्चा भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में सीएचसी और पीएचसी मरीजों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में यदि कार्य बहिष्कार लंबा चलता है, तो मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, कितने डॉक्टर कार्य बहिष्कार में शामिल हैं और किन स्वास्थ्य केंद्रों में सेवाएं प्रभावित हुई हैं, इसकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
अब सरकार के फैसले पर नजर
बॉन्डेड डॉक्टरों के आंदोलन के बीच अब निगाहें सरकार और स्वास्थ्य विभाग के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि बातचीत के जरिए वेतन विसंगति का समाधान निकलता है, तो आंदोलन समाप्त होने का रास्ता खुल सकता है। फिलहाल डॉक्टर समान वेतन की मांग पर जोर दे रहे हैं।

अक्षर भारत लाइव की नजर इस पूरे घटनाक्रम पर बनी हुई है।











