हवा में 14 हजार फीट नीचे गिरा विमान, PM मोदी से बोले स्मित मच्छार- ‘मैं हनुमान चालीसा पढ़ रहा था’
नई दिल्ली। फ्लाईदुबई की उड़ान में हुए उस खौफनाक घटनाक्रम के बाद भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत में उस रात की पूरी कहानी साझा की। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद विमान में सवार यात्रियों की जान बचाने के लिए उठाए गए उनके कदमों की प्रधानमंत्री मोदी ने सराहना की।
2 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अस्पताल में भर्ती कैप्टन स्मित मच्छार से वीडियो कॉल के जरिए बातचीत की। इस दौरान स्मित ने बताया कि संकट के उन बेहद मुश्किल पलों में उन्हें किस चीज से हिम्मत मिली और कैसे उन्होंने घायल अवस्था में कॉकपिट का दरवाजा खोलने का आखिरी प्रयास किया।

कॉकपिट में हुआ हमला, तेजी से नीचे गिरने लगा विमान
घटना 30 सितंबर की है। दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान के दौरान कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार पर उनके सह-पायलट ने कथित तौर पर हमला कर दिया।
हमले में स्मित गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी दौरान विमान तेजी से नीचे जाने लगा। रॉयटर्स के मुताबिक विमान करीब 14 हजार फीट नीचे गिर गया और यह गिरावट 30 सेकंड से भी कम समय में हुई। विमान में 174 लोग सवार थे।
स्मित ने प्रधानमंत्री मोदी को बताया कि घायल होने के बाद भी उन्हें यह समझ में आ गया था कि विमान की स्थिति बेहद गंभीर है और उनके पास कार्रवाई करने के लिए केवल कुछ सेकंड हैं।

‘मैं लगातार हनुमान चालीसा पढ़ रहा था’
प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में कैप्टन स्मित मच्छार ने बताया कि संकट की उस घड़ी में वह लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे थे।
स्मित के मुताबिक, मुश्किल समय में हनुमान चालीसा का पाठ करना उन्हें हिम्मत देता है और विमान में हुए इस हमले के दौरान भी उन्होंने ऐसा ही किया।
उन्होंने बताया कि घायल होने के बावजूद उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद यात्री और क्रू के सदस्य कॉकपिट में पहुंचे और हमलावर को काबू करने में मदद मिली।
यहां यह बात महत्वपूर्ण है कि हनुमान चालीसा को लेकर यह स्मित मच्छार का स्वयं बताया हुआ अनुभव है—उन्होंने इसे उस समय अपने लिए साहस और मानसिक संबल का स्रोत बताया।
घायल पायलट ने यात्रियों को बचाने के लिए लगाया आखिरी जोर
स्मित ने बताया कि हमले के बाद वह घायल होकर नीचे गिर गए थे, लेकिन उन्हें पता था कि विमान लगातार नीचे जा रहा है।
उनके सामने दो विकल्प थे—या तो अपनी चोटों के बावजूद उठकर कुछ किया जाए, या फिर विमान में सवार लोगों की जान खतरे में पड़ जाए।
उन्होंने अपनी पूरी ताकत लगाकर कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने की कोशिश की और दरवाजा खोल दिया।
इसके बाद यात्रियों और क्रू के सदस्यों को कॉकपिट में पहुंचने का मौका मिला। हमलावर को काबू किया गया और बाद में विमान को सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित उतारा गया।

पीएम मोदी ने की स्मित के साहस की सराहना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छार के साहस, धैर्य और मुश्किल परिस्थिति में तुरंत फैसला लेने की क्षमता की सराहना की।
बातचीत के दौरान स्मित भावुक भी हुए। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि उनके लिए उनसे बात करना बेहद खास क्षण है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्मित ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना बड़ा आदर्श भी बताया।
प्रधानमंत्री ने स्मित के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और उनके साहस को याद करते हुए कहा कि उनके कार्यों ने अनेक जिंदगियों को बचाने में मदद की।
एक तरफ चोट, दूसरी तरफ सैकड़ों जिंदगियों की जिम्मेदारी
फ्लाईदुबई की इस घटना में कैप्टन स्मित मच्छार खुद गंभीर रूप से घायल हुए, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
एक ओर कॉकपिट में हमला था…
दूसरी ओर विमान तेजी से नीचे जा रहा था…
शरीर पर गंभीर चोटें थीं…
और सामने सैकड़ों जिंदगियों की जिम्मेदारी…
ऐसे वक्त में स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने का फैसला किया।
और प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में उन्होंने बताया कि उन मुश्किल पलों में हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए उन्होंने खुद को संभाला और कार्रवाई करने की ताकत जुटाई।
कैप्टन स्मित मच्छार फिलहाल अस्पताल में उपचाराधीन हैं और उनके साहस की चर्चा भारत के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है।
रिपोर्ट — अक्षर भारत।
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