October 28, 2026 2:17 am

“एक कटोरी, दो समोसा… योगी तेरा क्या भरोसा!” लखनऊ में आशा वर्कर्स की आवाज, मानदेय और सम्मान की मांग

लखनऊ। अरविन्द श्रीवास्तव ।  राजधानी लखनऊ का ईको गार्डन एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी महिला कार्यकर्ताओं की आवाज का केंद्र बना। आशा वर्कर्स और आशा संगिनियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन करते हुए सरकार के सामने अपनी समस्याएं रखने की कोशिश की।

प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारों ने लोगों का ध्यान खींचा। आशा वर्कर्स की ओर से मानदेय बढ़ाने, लंबित प्रोत्साहन राशि का भुगतान, बीमा और सेवा से जुड़ी अन्य सुविधाओं की मांग उठाई जा रही है। हालिया रिपोर्टों में आशा कार्यकर्ताओं की ओर से राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने और मानदेय बढ़ाकर 26 हजार रुपये करने जैसी मांगों का भी उल्लेख है।

गांव की स्वास्थ्य व्यवस्था की अहम कड़ी

आशा वर्कर्स की भूमिका ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण मानी जाती है। गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाने, उन्हें स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने, टीकाकरण और विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में सहयोग करने जैसे कामों में आशा कार्यकर्ता अपनी भूमिका निभाती हैं।

 

कई बार इन्हें गांवों और दूरदराज के इलाकों में घर-घर जाकर काम करना पड़ता है। मौसम कैसा भी हो, स्वास्थ्य संबंधी जरूरत के समय लोगों तक पहुंचना इनके काम का हिस्सा है।

यही वजह है कि प्रदर्शन कर रही आशा वर्कर्स अपने काम के अनुरूप आर्थिक सम्मान और सुविधाओं की मांग कर रही हैं।

“मेहनत का सम्मान चाहिए”

आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी जिम्मेदारियां लगातार बढ़ती गई हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति और पारिश्रमिक को लेकर अब भी कई सवाल बने हुए हैं।

हालिया प्रदर्शनों में लंबित प्रोत्साहन राशि के भुगतान, मानदेय में बढ़ोतरी, आशा संगिनियों के भुगतान में वृद्धि तथा मातृत्व अवकाश और स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा जैसी सुविधाओं की मांग भी सामने आई है।

आशा वर्कर्स का तर्क है कि यदि उनसे स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य लिए जाते हैं, तो उनके श्रम का उचित सम्मान और पारिश्रमिक भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

नारे बने चर्चा का विषय

ईको गार्डन में प्रदर्शन के दौरान “एक कटोरी, दो समोसा… योगी तेरा क्या भरोसा” जैसे नारे चर्चा में रहे। इन नारों के जरिए प्रदर्शनकारी अपनी नाराजगी और मांगों को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करती दिखाई दीं।

आशा वर्कर्स का आंदोलन सिर्फ आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार यह उनके श्रम, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान से भी जुड़ा विषय है।

अब देखना होगा कि सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है और आशा वर्कर्स की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

 

Leave a Comment

और पढ़ें

best news portal development company in india

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें