एकता नगर, गुजरात। लोकप्रिय फिल्म कलाकारों की समाज और खासकर युवाओं पर पड़ने वाली गहरी छाप को देखते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने फिल्मी सितारों से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का प्रचार नहीं करने की अपील की है। राष्ट्रपति ने कहा कि लोकप्रिय कलाकारों में लोगों को प्रभावित करने की असीम क्षमता होती है और करोड़ों बच्चे तथा युवा उन्हें देखकर प्रेरणा लेते हैं।

राष्ट्रपति मुर्मु ने यह बात 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर (केवड़िया) में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में अपने संबोधन के दौरान कही। समारोह में राष्ट्रपति ने वर्ष 2024 के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए और वरिष्ठ अभिनेता अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया।
‘Star वही है जो रोशनी फैलाए’
राष्ट्रपति ने फिल्म कलाकारों के सामाजिक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जो कलाकार बहुत लोकप्रिय होते हैं, उनमें देशवासियों और विशेषकर युवाओं को प्रभावित करने की बड़ी क्षमता होती है।

उन्होंने कहा कि जब सफल फिल्म कलाकार अनुशासित जीवनशैली के लाभों के बारे में बताते हैं तो करोड़ों बच्चे और युवा उनका अनुकरण करते हैं। इसी संदर्भ में राष्ट्रपति ने लोकप्रिय कलाकारों से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का endorsement नहीं करने का अनुरोध किया।
राष्ट्रपति ने अपने संदेश को एक प्रभावशाली पंक्ति के साथ समाप्त किया—
“Star वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं।”

राष्ट्रपति का यह बयान किसी एक अभिनेता या किसी विशेष ब्रांड का नाम लिए बिना लोकप्रिय कलाकारों की विज्ञापन और सार्वजनिक भूमिका से जुड़ी व्यापक जिम्मेदारी की ओर इशारा करता है।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में दिया संदेश
72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में राष्ट्रपति ने भारतीय सिनेमा की विविधता की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्में देश की अलग-अलग भाषाओं, परंपराओं, आकांक्षाओं और संघर्षों को सामने लाती हैं।

इस बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का आयोजन दिल्ली से बाहर एकता नगर, केवड़िया, गुजरात में किया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को देश के अलग-अलग राज्यों और प्रमुख पर्यटन स्थलों तक ले जाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है।
अनंत नाग को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार
समारोह में वरिष्ठ अभिनेता अनंत नाग को वर्ष 2024 का प्रतिष्ठित दादासाहेब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया।

राष्ट्रपति ने भारतीय सिनेमा में उनके लंबे योगदान की सराहना की। पांच दशक से अधिक लंबे करियर वाले अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इस सम्मान के लिए चुना गया था।
फिल्म इंडस्ट्री के छोटे कलाकारों और कर्मचारियों की भी चिंता
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने संबोधन में फिल्म उद्योग के उन लोगों का भी उल्लेख किया जो कैमरे के पीछे रहकर फिल्मों को बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि फिल्म उद्योग की कार्य संस्कृति में टीम के प्रत्येक सदस्य के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता होनी चाहिए। उन्होंने रचनात्मक क्षेत्र से जुड़े वर्कर्स, छोटे कलाकारों, असिस्टेंट्स और संघर्ष कर रहे लोगों को उचित सम्मान और सामाजिक सुरक्षा देने की जरूरत पर जोर दिया।

राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की जूरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता की बात भी कही और कहा कि महिलाओं का दृष्टिकोण शामिल होने से किसी भी क्षेत्र में अधिक व्यापक मानवीय दृष्टिकोण विकसित किया जा सकता है।
सितारों की लोकप्रियता के साथ जिम्मेदारी का संदेश
राष्ट्रपति के संबोधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा फिल्मी सितारों की लोकप्रियता और उससे जुड़ी सामाजिक जिम्मेदारी पर केंद्रित रहा।
आज फिल्मों के कलाकार केवल पर्दे पर नजर आने वाले चेहरे नहीं हैं, बल्कि विज्ञापनों और सोशल मीडिया के जरिए भी करोड़ों लोगों तक पहुंचते हैं। ऐसे में उनके द्वारा दिए जाने वाले संदेश और प्रचार का असर खासकर युवा दर्शकों पर पड़ सकता है।

इसी प्रभाव का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कलाकारों से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों के endorsement से बचने का अनुरोध किया।
राष्ट्रपति का संदेश स्पष्ट था कि लोकप्रियता केवल प्रसिद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का अवसर भी है।
और इसी संदेश को उन्होंने एक पंक्ति में समेट दिया—
‘Star वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं।’











