रायबरेली। अरविन्द श्रीवास्तव । उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिला महिला अस्पताल से स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला मामला सामने आया है। प्रसव के लिए अस्पताल पहुंची एक गर्भवती महिला का अस्पताल के गेट के बाहर ही प्रसव हो गया। परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ पर प्रसव के नाम पर ₹10 हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है।

परिजनों के मुताबिक, सलोन क्षेत्र की रहने वाली महिला प्रतिभा को प्रसव पीड़ा के बाद जिला महिला अस्पताल लाया गया था। परिवार का आरोप है कि प्रसव के लिए उनसे रुपये मांगे गए और आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वे रकम नहीं दे सके। इसके बाद महिला को बाहर जाने के लिए कहा गया।
परिजनों का दावा है कि महिला को अस्पताल के गेट तक ले जाते समय अचानक प्रसव पीड़ा तेज हो गई और वहीं बच्चे का जन्म हो गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। इसके बाद महिला और नवजात को अस्पताल के अंदर भर्ती कराया गया।

घटना से नाराज परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा भी किया और डॉक्टर तथा स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए। पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को शांत कराया।
हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने परिजनों के आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है। अस्पताल की सीएमएस डॉ. निर्मला साहू के मुताबिक, महिला अस्पताल से बिना बताए बाहर चली गई थी और बाहर ही प्रसव प्रक्रिया शुरू हुई। इसके बाद उसे तत्काल अस्पताल के अंदर लाया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार जच्चा और बच्चा दोनों का इलाज किया गया और बच्चे को आईसीयू में रखा गया।
फिलहाल इस मामले में आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रसव पीड़ा से जूझ रही महिला अस्पताल के गेट तक कैसे पहुंची और क्या वास्तव में प्रसव के नाम पर पैसे की मांग की गई थी?

परिजनों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस के मुताबिक अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है; शिकायत मिलने पर जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अक्षर भारत का सवाल: सरकारी अस्पताल गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए सबसे बड़ा सहारा होते हैं। ऐसे में यदि किसी मरीज से इलाज या प्रसव के नाम पर अवैध रकम मांगे जाने की शिकायत सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और जवाबदेही बेहद जरूरी हो जाती है।











