October 28, 2026 3:17 am

नेपाल-चीन सीमा पर कुदरत का कहर, भोटेकोशी में भीषण बाढ़ से भारी तबाही

सैलाब में बहे घर, सड़कें और पुल; नेपाली सेना ने संभाला मोर्चा, हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू जारी

काठमांडू। अरविन्द श्रीवास्तव । नेपाल-चीन सीमा के पास कुदरत ने ऐसा रौद्र रूप दिखाया कि देखते ही देखते पूरा इलाका तबाही के सैलाब में बदल गया। रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई अचानक और भीषण फ्लैश फ्लड ने गांवों, बाजारों, सड़कों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।

भोटेकोशी नदी ने लिया विकराल रूप

बुधवार को आई इस विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया। तेज बहाव अपने साथ मलबा, पेड़ और निर्माण सामग्री बहाता हुआ आगे बढ़ा।

कई जगहों पर पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गईं, जबकि नदी किनारे बसे इलाकों में पानी और मलबे ने भारी तबाही मचाई। प्रभावित क्षेत्रों में बिजली और परिवहन व्यवस्था भी बाधित हुई है।

प्रारंभिक रिपोर्टों में इस आपदा के पीछे पहाड़ी क्षेत्र में बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से के ढहने से पैदा हुई अचानक बाढ़ को प्रमुख कारण बताया गया है। इसलिए सोशल मीडिया पर चल रहे भूकंप से जुड़े दावों को आधिकारिक पुष्टि के बिना तथ्य मानना उचित नहीं होगा।

बड़ी संख्या में लोगों की मौत और लापता होने की खबर

आपदा का असर इतना व्यापक है कि मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार अपडेट हो रही है। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल और चीन के प्रभावित सीमा क्षेत्र में सैकड़ों लोगों की मौत और बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। राहत और बचाव अभियान जारी रहने के कारण आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है।

नेपाल पर्यटन बोर्ड की शुरुआती सूची में 384 यात्री संपर्क से बाहर बताए गए थे, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक शामिल थे। शुरुआती सूची में 105 भारतीय नागरिक भी शामिल थे। बाद की रिपोर्टों में लापता लोगों के आंकड़े और बढ़े हैं, इसलिए इन संख्याओं का आधिकारिक अपडेट जरूरी है।

जब चारों तरफ तबाही थी, सेना बनी उम्मीद

इस भयावह आपदा के बीच नेपाली सेना और सुरक्षा बलों ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में जवान लोगों को सुरक्षित निकालने, घायलों को उपचार दिलाने और राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं।

नेपाल न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, 336 प्रभावित लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें छह देशों के 45 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। नेपाली सेना के करीब 4,000 जवान खोज और बचाव अभियान में लगाए गए हैं।

हेलिकॉप्टर से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन

जहां जमीन के रास्ते पहुंचना मुश्किल है, वहां हेलिकॉप्टरों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।

रसुवा के तिमुरे, धुन्चे और मेलुंग क्षेत्रों से प्रभावित लोगों को एयरलिफ्ट किया गया है। सेना के जवान राहत, प्राथमिक चिकित्सा और बचाव कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं।

नेपाल में इस समय हजारों सुरक्षा और बचावकर्मी राहत अभियान में लगाए गए हैं। नेपाल न्यूज के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में 7,415 सुरक्षा कर्मियों को खोज, बचाव और राहत कार्यों के लिए तैनात किया गया है।

विदेशी नागरिकों के लिए आपातकालीन टीम गठित

बाढ़ में विदेशी नागरिकों के प्रभावित होने और कई लोगों के संपर्क से बाहर होने के बाद नेपाल के विदेश मंत्रालय ने Emergency Response Team गठित की है।

नेपाल सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करें और विदेशी नागरिकों से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक माध्यमों का इस्तेमाल करें।

आपदा के बीच इंसानियत की तस्वीर

एक तरफ पानी और मलबे का सैलाब है… दूसरी तरफ लोगों को बचाने में जुटे जवान।

तेज बहाव के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन, हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने की कोशिशें यह दिखाती हैं कि प्राकृतिक आपदा कितनी भी भयावह क्यों न हो, इंसानियत और हौसला उसके सामने डटकर खड़ा हो सकता है।

नेपाल की इस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदनाएं और राहत-बचाव अभियान में जुटे सभी जवानों एवं बचावकर्मियों को सलाम।

Axar Bharat Live की अपील—बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहें, अफवाहों पर विश्वास न करें और किसी भी आपदा संबंधी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।

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