शमिक भट्टाचार्य ने तैमूर का नाम लेकर कसा तंज, इंद्रनील खान ने भी उठाए सवाल
कोलकाता। अरविन्द श्रीवास्तव । दिग्गज अभिनेत्री शर्मिला टैगोर इन दिनों अपनी फिल्मों को लेकर नहीं, बल्कि वंदे मातरम् को लेकर दिए गए एक बयान के कारण सुर्खियों में हैं। उनके बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में भी इस मुद्दे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने शर्मिला टैगोर पर तीखा हमला बोलते हुए उनके पोते तैमूर अली खान के नाम का भी जिक्र कर दिया।
क्या कहा था शर्मिला टैगोर ने?
शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम् के पूरे गीत को लेकर धार्मिक विविधता के संदर्भ में अपनी राय रखी थी। उनका कहना था कि भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष देश में अलग-अलग धार्मिक मान्यताओं वाले लोगों की भावनाओं को भी ध्यान में रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि गीत के शुरुआती दो अंतरे सभी के लिए अधिक स्वीकार्य हो सकते हैं, जबकि आगे के हिस्सों में देवी-देवताओं के संदर्भ के कारण कुछ एकेश्वरवादी धर्मों के लोगों को असहजता हो सकती है।

शमिक भट्टाचार्य ने तैमूर का नाम लेकर साधा निशाना
शर्मिला टैगोर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल BJP अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत मत है, लेकिन उन्होंने इसी दौरान ऐतिहासिक शासक तैमूर का जिक्र करते हुए शर्मिला टैगोर के पोते तैमूर अली खान का नाम भी उठाया।

शमिक भट्टाचार्य ने तर्क दिया कि इतिहास में तैमूर को भारत पर आक्रमण करने वाले शासक के रूप में याद किया जाता है और इसी नाम का इस्तेमाल शर्मिला टैगोर के पोते के लिए किया गया है। इसी आधार पर उन्होंने शर्मिला टैगोर को वंदे मातरम् के मुद्दे पर कम बोलने की नसीहत दी।
इंद्रनील खान ने भी साधा निशाना
इस विवाद में पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री इंद्रनील खान ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि देशभक्ति की सीख शर्मिला टैगोर या कांग्रेस से लेने की जरूरत क्यों होनी चाहिए।

इंद्रनील खान ने स्वतंत्रता आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई लड़ने वाले लोगों ने आनंदमठ और वंदे मातरम् से प्रेरणा ली थी। गौरतलब है कि आनंदमठ के लेखक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय थे और इसी उपन्यास में वंदे मातरम् गीत शामिल था।
बयान से बढ़ा राजनीतिक विवाद
शर्मिला टैगोर के बयान के बाद अब यह मुद्दा सिर्फ फिल्म और कला जगत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। BJP नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया के बाद वंदे मातरम्, धार्मिक विविधता और देशभक्ति को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

एक तरफ शर्मिला टैगोर अपने बयान को धार्मिक विविधता और सभी समुदायों की स्वीकार्यता के नजरिए से रखती दिखाई देती हैं, तो दूसरी तरफ BJP नेता इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान और देशभक्ति के सवाल से जोड़कर देख रहे हैं।
अब देखना होगा कि वंदे मातरम् को लेकर शुरू हुई यह बहस आने वाले दिनों में किस राजनीतिक मोड़ तक पहुंचती है।
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