खाद्य विभाग की छापेमारी में करीब 2 हजार लीटर दूध भी मिला, सैंपल लेकर नकली पनीर कराया गया नष्ट
मथुरा।अरविन्द श्रीवास्तव ।
त्योहारों का मौसम हो या आम दिन… हमारी थाली में पहुंचने वाले दूध, पनीर और दूसरे खाद्य पदार्थों की शुद्धता हमेशा बड़ा सवाल रहती है। लेकिन मथुरा से सामने आई कार्रवाई ने एक बार फिर मिलावट के इस पूरे खेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मथुरा में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने छापेमारी कर करीब 5 क्विंटल संदिग्ध नकली पनीर बरामद किया है। कार्रवाई के दौरान लगभग 2 हजार लीटर दूध भी टीम के हाथ लगा।
खाद्य विभाग ने बरामद खाद्य पदार्थों के सैंपल जांच के लिए भेजे हैं और अधिकारियों के मुताबिक संदिग्ध नकली पनीर को मौके पर ही नष्ट कराया गया।
लेकिन असली सवाल यहीं से शुरू होता है…
आखिर कब तक चलता रहेगा मिलावट का खेल?
प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। थोक बाजारों, डेयरी और खाद्य पदार्थों से जुड़ी इकाइयों पर निगरानी की जा रही है। कई जिलों से मिलावटी या मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले खाद्य पदार्थ मिलने की खबरें भी सामने आती रहती हैं।
मथुरा की यह कार्रवाई भी बताती है कि मिलावटखोरों पर निगरानी की जरूरत कितनी गंभीर है।

लेकिन सवाल यह है कि…
क्या सिर्फ छापेमारी, सैंपलिंग और संदिग्ध खाद्य पदार्थ नष्ट कर देने से मिलावट का खेल खत्म हो जाएगा?
अगर किसी कारोबारी के यहां बड़ी मात्रा में मिलावटी या संदिग्ध खाद्य पदार्थ मिलता है, तो आगे की कार्रवाई कितनी प्रभावी होती है?
क्या जांच के बाद दोषियों पर समयबद्ध और कड़ी कार्रवाई होती है?

और सबसे बड़ा सवाल…
आखिर मिलावटखोरों में कानून का डर कितना है?
जनता की थाली से खिलवाड़ आखिर कब रुकेगा?
दूध और पनीर जैसी रोजमर्रा की चीजों में मिलावट सिर्फ व्यापार से जुड़ा मामला नहीं है। यह सीधे आम आदमी की थाली और उसके भरोसे से जुड़ा मुद्दा है।

खाद्य विभाग की सक्रियता निश्चित तौर पर जरूरी है, लेकिन कार्रवाई का असर तभी दिखेगा जब छापेमारी के साथ-साथ जांच, मुकदमा और दोष सिद्ध होने पर प्रभावी दंड भी सुनिश्चित हो।
मथुरा में हुई कार्रवाई के बाद अब निगाह इस बात पर है कि बरामद खाद्य पदार्थों की जांच में क्या सामने आता है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होती है।
क्योंकि सवाल सिर्फ 5 क्विंटल पनीर का नहीं…
सवाल है हमारी थाली में आखिर क्या पहुंच रहा है?
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