उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई दस्तक! दिव्या मित्तल ने किया बड़ा ऐलान, अकेले चुनाव लड़ेगी जननीति भारत
न पैसा, न बड़े प्रचार का दावा; घर-घर पहुंचने की तैयारी, जनता की जरूरत और लड़कियों की सुरक्षा पर फोकस।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच राजनीति में एक नई पहल की चर्चा शुरू हो गई है। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के नेतृत्व में जननीति भारत ने उत्तर प्रदेश का विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ने का ऐलान किया है। पार्टी ने साफ किया है कि वह किसी दूसरी राजनीतिक पार्टी के सहारे चुनावी मैदान में नहीं उतरेगी।
जननीति भारत की इस घोषणा के केंद्र में है एक सवाल—क्या राजनीति में जनता की भूमिका केवल वोट डालने तक सीमित रहनी चाहिए, या सरकार के फैसलों में भी उसकी भागीदारी होनी चाहिए?
दिव्या मित्तल का कहना है कि आज की राजनीति में जनता को लगता है कि उस पर राज किया जा रहा है, जबकि जननीति का उद्देश्य जनता को निर्णय प्रक्रिया के केंद्र में लाना है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में जनता की भागीदारी केवल चुनाव के एक दिन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे पांच साल तक उसकी आवाज सुनी जानी चाहिए।
जननीति भारत के तीन संकल्प

पार्टी ने अपने एजेंडे में तीन प्रमुख संकल्पों की बात रखी है।
पहला संकल्प है कि देश की नीतियों के केंद्र में आम लोग होंगे और नीतियां तय करने की प्रक्रिया में भी जनता की भागीदारी होगी।
दूसरा संकल्प है कि फैसले लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे, न कि उनकी पहचान के आधार पर। यानी पार्टी का जोर इस बात पर है कि सरकारी निर्णयों का आधार जरूरत और परिस्थितियां हों।
तीसरा प्रमुख मुद्दा है लड़कियों की सुरक्षा। दिव्या मित्तल के अनुसार, सुरक्षा के इंतजाम किसी घटना के बाद चर्चा में आने के बजाय पहले से ही मजबूत होने चाहिए। इस विचार के जरिए पार्टी ने महिला सुरक्षा को अपने राजनीतिक एजेंडे का अहम हिस्सा बताया है।
पैसा नहीं, घर-घर पहुंचने का भरोसा
चुनाव प्रचार के तौर-तरीकों को लेकर भी दिव्या मित्तल ने अपनी बात रखी है। उनके मुताबिक, जननीति भारत के पास बड़े पैमाने पर प्रचार कराने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं है। ऐसे में पार्टी घर-घर और द्वार-द्वार पहुंचने की रणनीति अपनाएगी।
उनकी सोच है कि हर घर पार्टी का दफ्तर बने और उस घर का व्यक्ति ही पार्टी का संदेश लोगों तक पहुंचाने वाला प्रचारक बने।
दिव्या मित्तल की इस घोषणा के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि जननीति भारत अपने तीन संकल्पों को जमीनी स्तर पर किस तरह आगे बढ़ाती है, संगठन का विस्तार कैसे करती है और जनता तक पहुंचने की अपनी योजना को कितना प्रभावी बना पाती है।
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों और नए राजनीतिक प्रयासों की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में जननीति भारत की अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा और जनता की भागीदारी पर उसका जोर आने वाले दिनों में चर्चा का विषय बन सकता है।
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