चार गोल्ड मेडल… फिर भी हाथ में सब्जियों की टोकरी!
जिस हाथ ने भारत के लिए गोल्ड मेडल जीते, आज वही हाथ सब्जियां बेचने को मजबूर है।

सोचिए… जब देश का तिरंगा ऊंचा होता है, राष्ट्रगान बजता है और मंच पर भारत के खिलाड़ी के गले में गोल्ड मेडल चमकता है, तो उस पल हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
लेकिन उसी खिलाड़ी की जिंदगी का दूसरा सच शायद आपको झकझोर कर रख दे।
यह कहानी है झारखंड के 29 वर्षीय अंतरराष्ट्रीय थ्रो-बॉल खिलाड़ी अमरदीप की।
अमरदीप ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए चार गोल्ड मेडल अपने नाम किए। उन्होंने मैदान पर पसीना बहाया, देश के लिए खेला और भारत का नाम दुनिया के सामने रोशन किया।
लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है।
मेडल जीतने वाला यह खिलाड़ी रांची के अरगोड़ा चौक पर सब्जियां बेचता नजर आता है… और परिवार का खर्च चलाने के लिए कैब भी चलाता है।
जिस खिलाड़ी के गले में कभी देश के लिए जीते गोल्ड मेडल चमकते थे, आज उसके सामने सबसे बड़ा सवाल है—
आखिर अपनी जिंदगी कैसे चले?
अमरदीप का कहना है कि वह 2016 से प्रोत्साहन राशि पाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। वहीं 2020 से सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उन्हें कई बार आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ा। यहां तक कि प्रतियोगिताओं में जाने के लिए कर्ज तक लेना पड़ा।
यानी जिस खिलाड़ी को देश की तरफ से सम्मान मिलना चाहिए था, वही खिलाड़ी अपने भविष्य के लिए संघर्ष करता रहा।
अब अमरदीप की कहानी सामने आने के बाद मामला सरकार तक पहुंचा है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खेल विभाग को मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। सरकार की ओर से अमरदीप के लिए सरकारी नौकरी और रोजगार के विकल्प तलाशने की बात सामने आई है।
उम्मीद है कि अब चार गोल्ड मेडल जीत चुके इस खिलाड़ी को अपनी रोजी-रोटी के लिए मैदान के बाहर ऐसी जद्दोजहद नहीं करनी पड़ेगी।
लेकिन अमरदीप की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं है।
यह एक बड़ा सवाल है—

क्या खिलाड़ी का सम्मान सिर्फ मेडल जीतने तक ही सीमित है?
जब तक वह मैदान पर देश के लिए खेलता है, हम उसके मेडल पर गर्व करते हैं… उसकी तस्वीरें साझा करते हैं… तालियां बजाते हैं।
लेकिन प्रतियोगिता खत्म होने के बाद?
क्या उस खिलाड़ी के भविष्य की जिम्मेदारी भी हमारी व्यवस्था की नहीं होनी चाहिए?
चार गोल्ड मेडल जीतने वाले अमरदीप आज सब्जियां बेच रहे हैं…
तो सवाल सिर्फ यह नहीं कि अमरदीप सब्जी क्यों बेच रहे हैं।
सवाल यह है कि
जिस देश के लिए उन्होंने चार बार गोल्ड जीता, क्या उस देश की व्यवस्था उन्हें एक सम्मानजनक भविष्य नहीं दे सकती?
उम्मीद करते हैं कि अमरदीप की यह कहानी सिर्फ खबर बनकर न रह जाए…
बल्कि उन तमाम खिलाड़ियों के लिए बदलाव की वजह बने, जो आज भी अपने सपनों और अपने भविष्य के बीच संघर्ष कर रहे हैं।
क्योंकि खिलाड़ी सिर्फ मेडल नहीं जीतता…
वह देश का गौरव जीतता है।











