नई दिल्ली/अटारी-वाघा/लखनऊ/धमतरी। अरविन्द श्रीवास्तव ।
आज पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा नजर आया। अटारी-वाघा बॉर्डर से लेकर देश के गांव-कस्बों और महानगरों तक तिरंगा शान से लहराता दिखाई दिया। कहीं भारत माता के जयकारे गूंजे तो कहीं वंदे मातरम् के स्वर ने स्वतंत्रता दिवस के माहौल को और भी भावुक बना दिया।

भारत ने आज अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाया। लाल किले की प्राचीर से लेकर सीमा की चौकियों तक देशभक्ति और राष्ट्रगौरव का नजारा देखने को मिला। इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह को वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर ने भी खास बना दिया।
वाघा बॉर्डर पर जवानों का जोश
अटारी-वाघा बॉर्डर पर स्वतंत्रता दिवस का उत्साह देखते ही बना। सीमा पर भारतीय जवानों की शानदार परेड और कदमताल ने वहां मौजूद लोगों में जोश भर दिया।
वाघा बॉर्डर भारत-पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है और पाकिस्तान के लाहौर शहर से इसकी दूरी लगभग 30 किलोमीटर के आसपास है। ऐसे संवेदनशील सीमा क्षेत्र में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सुरक्षा व्यवस्था और देशभक्ति का माहौल खास आकर्षण का केंद्र रहा।


भारतीय जवानों की कदमताल और तिरंगे की शान ने वहां मौजूद लोगों को यह एहसास कराया कि आजादी का जश्न सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं, बल्कि देश की सीमाओं तक फैला हुआ है।
लाल किले से पीएम मोदी के बड़े ऐलान
इधर नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराकर देश को संबोधित किया।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने युवाओं, रोजगार, तकनीक, सुरक्षा, खेल और विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर दिया।

युवाओं के लिए सबसे अहम घोषणाओं में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग देने की बात शामिल रही।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ट्रेनिंग देने का ऐलान किया। सरकार का उद्देश्य युवाओं को भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप तैयार करना और भारत की युवा शक्ति को नई तकनीक से जोड़ना है।
सिविल डिफेंस का आधुनिक नेटवर्क
प्रधानमंत्री ने देश की नागरिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा विजन सामने रखा।
उन्होंने एक आधुनिक और मजबूत सिविल डिफेंस नेटवर्क विकसित करने की बात कही, ताकि प्राकृतिक आपदाओं, तकनीकी संकटों और अन्य आपात परिस्थितियों में नागरिकों की सुरक्षा और राहत व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जा सके।

यानी आने वाले समय में संकट की स्थिति से निपटने के लिए देश का नागरिक सुरक्षा तंत्र और अधिक आधुनिक तथा तैयार दिखाई दे सकता है।
2036 ओलंपिक के लिए बचपन से प्रतिभाओं की तलाश
खेलों को लेकर भी प्रधानमंत्री ने बड़ा लक्ष्य सामने रखा।
देशभर में 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों के बीच खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए राष्ट्रीय स्तर पर टैलेंट हंट अभियान चलाने की बात कही गई है।
इसका मकसद गांवों, कस्बों और शहरों में छिपी प्रतिभाओं को तलाशना और उन्हें उचित प्रशिक्षण देकर भविष्य के बड़े खिलाड़ी तैयार करना है।
यानी आज स्कूल के मैदान में खेल रहा कोई बच्चा कल भारत के लिए ओलंपिक पदक जीतता दिखाई दे सकता है।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष ने बढ़ाया गौरव
इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस इसलिए भी खास रहा क्योंकि देश वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने का वर्षभर चलने वाला स्मरण समारोह मना रहा है।

लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में इस बार वंदे मातरम् को विशेष स्थान दिया गया। केंद्र सरकार ने 2025 से 2026 तक इसके 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशव्यापी कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
देशभर में आम लोगों से लेकर पुलिसकर्मियों, विद्यार्थियों और विभिन्न क्षेत्रों की हस्तियों तक ने स्वतंत्रता दिवस और वंदे मातरम् के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।
पुलिसकर्मी भी देशभक्ति के रंग में
आजादी के इस पर्व का उत्साह पुलिस विभाग में भी देखने को मिला। उत्तर प्रदेश के बागपत से सामने आए एक दृश्य में पुलिसकर्मी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभक्ति के रंग में नजर आए।


वहीं राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी आवास पर ध्वजारोहण किया। इस दौरान अधिकारी और कर्मचारी भी मौजूद रहे।
देश की सुरक्षा में पुलिस और सुरक्षा बलों की भूमिका को याद करते हुए स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जवानों के योगदान को भी सम्मान दिया गया।
कुरुद में कथित झंडा विवाद ने खड़े किए सवाल
जहां देशभर में तिरंगे की शान में स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा था, वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरुद से सामने आए एक कथित वायरल वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि कुरुद नगर पालिका परिसर स्थित स्वामी विवेकानंद मंगल भवन में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्रीय ध्वज के बजाय भाजपा का झंडा फहराया गया।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि आखिर स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज के स्थान पर राजनीतिक दल का झंडा फहराया गया या नहीं?
हालांकि यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वायरल वीडियो और उससे जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। इसलिए प्रशासन या संबंधित अधिकारियों की ओर से आधिकारिक बयान अथवा जांच सामने आने से पहले इस मामले में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
लेकिन सवाल जरूर बड़ा है—तिरंगा पूरे देश का है और उसकी गरिमा से जुड़ा कोई भी मामला गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

आजादी का जश्न और नए भारत का संकल्प
आज का दिन सिर्फ तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने का दिन नहीं, बल्कि उन स्वतंत्रता सेनानियों को याद करने का अवसर भी है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
वाघा बॉर्डर पर जवानों की कदमताल हो, लाल किले से प्रधानमंत्री के बड़े ऐलान हों, स्कूलों में बच्चों का उत्साह हो या गांव-कस्बों में तिरंगे की शान—हर जगह एक ही भावना दिखाई दी।
भारत पहले… तिरंगा सबसे ऊपर!
आजादी के इस पर्व पर देश ने जहां अपने गौरवशाली अतीत को याद किया, वहीं AI, रोजगार, खेल, सुरक्षा और विकसित भारत के लक्ष्य के साथ भविष्य की ओर बढ़ने का संकल्प भी लिया।
और कुरुद से सामने आए कथित झंडा विवाद ने एक बार फिर यह सवाल सामने रख दिया कि राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान को लेकर हर नागरिक और हर संस्था को कितनी सजगता बरतनी चाहिए।
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जय हिंद!
वंदे मातरम्!











