अक्षर भारत लाइव | विशेष रिपोर्ट अरविन्द श्रीवास्तव |
मानसून की बारिश इस बार देश के कई हिस्सों में राहत से ज्यादा आफत का कारण बनती नजर आ रही है। रुक-रुककर और कई जगह लगातार हो रही बारिश ने शहरों की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। सड़कें जलमग्न हैं, यातायात प्रभावित है और कई स्थानों पर जलभराव के बीच सड़कें और गड्ढे दिखाई तक नहीं दे रहे हैं।
दिल्ली से लेकर आगरा, वाराणसी, गुरुग्राम और रांची तक सामने आई तस्वीरें शहरी व्यवस्था और जलनिकासी की तैयारियों पर सवाल खड़े कर रही हैं।

दिल्ली में जलभराव के बीच गड्ढे में गिरे तीन बच्चे
राजधानी दिल्ली में बारिश के बीच एक भयावह घटना सामने आई। स्कूल जाते समय तीन बच्चे सड़क पर जमा पानी से होकर गुजर रहे थे। इसी दौरान वे अचानक पानी में बने एक गहरे गड्ढे में जा गिरे।
एक-एक कर तीनों बच्चों को पानी में समाते देख आसपास मौजूद कुछ लोगों ने साहस दिखाया और पानी में उतरकर बच्चों को बाहर निकाला। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सड़क पर भरे पानी के नीचे मौजूद खतरनाक गड्ढों की जानकारी आम लोगों को कैसे मिलेगी और ऐसे स्थानों को समय रहते सुरक्षित क्यों नहीं किया जाता?

लाल किले के आसपास भी जलभराव
दिल्ली के लाल किले के आसपास की सड़कें भी बारिश के बाद पानी से लबालब नजर आईं। राजधानी में सरकार बदलने के बावजूद मानसून के दौरान जलभराव की तस्वीरें एक बार फिर सामने हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर हर साल बारिश के मौसम में दिल्ली को जलभराव की समस्या से स्थायी राहत कब मिलेगी?

आगरा में सड़क पर बना गहरा गड्ढा
उत्तर प्रदेश के आगरा में बारिश के बाद सड़क पर बने एक बड़े गड्ढे ने भी लोगों का ध्यान खींचा। सामने आए दृश्यों में गड्ढे की गहराई काफी अधिक दिखाई दे रही है। विपक्षी दलों से जुड़े लोगों ने सीढ़ी लगाकर गड्ढे की गहराई को दिखाया।
इस घटना को लेकर सड़क निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा होने से ऐसे गड्ढे वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी मुश्किलें
अब बात वाराणसी की, जहां बारिश के बाद कई इलाकों में जलभराव और सड़कों की खराब स्थिति ने लोगों की परेशानी बढ़ाई है।
ऑटो रिक्शा, मोटरसाइकिल और पैदल राहगीर—सभी को पानी और गड्ढों के बीच रास्ता तय करना पड़ रहा है। शहर की सड़कों की इन तस्वीरों ने जलनिकासी और सड़क रखरखाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

गुरुग्राम का IFFCO चौक बना जलमग्न
हरियाणा के गुरुग्राम में भी बारिश का असर साफ दिखाई दिया। शहर के प्रमुख IFFCO चौक पर भारी जलभराव के कारण सड़क का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा नजर आया।
हालात ऐसे रहे कि सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
देश के प्रमुख कॉर्पोरेट और आईटी हब में शामिल गुरुग्राम में हर साल बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। ऐसे में शहर की ड्रेनेज व्यवस्था और मानसून से पहले की तैयारियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

रांची के सरकारी अस्पताल में भी जलभराव
झारखंड की राजधानी रांची से सामने आई तस्वीरें भी चिंता बढ़ाने वाली हैं। शहर के बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र अस्पताल के परिसर में बारिश का पानी जमा होने की स्थिति दिखाई दी। कुछ तस्वीरों में अस्पताल के भीतर और वार्डों में भी पानी नजर आया।
अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के लिए ऐसी स्थिति बेहद परेशान करने वाली हो सकती है। इलाज के लिए अस्पताल पहुंचे लोगों के सामने अगर जलभराव की समस्या खड़ी हो जाए, तो स्थिति और गंभीर हो जाती है।

बारिश का कहर या व्यवस्था की परीक्षा?
दिल्ली, आगरा, वाराणसी, गुरुग्राम और रांची की तस्वीरें अलग-अलग हैं, लेकिन सवाल लगभग एक ही है—क्या हर साल मानसून के दौरान सामने आने वाली जलभराव और जलनिकासी की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा सकता?
बारिश प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन जलभराव, खुले गड्ढे और खराब जलनिकासी व्यवस्था को लेकर प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बारिश का मौसम कुछ समय बाद गुजर जाएगा। पानी सूख जाएगा और शहरों की जिंदगी सामान्य हो जाएगी। लेकिन यदि मानसून से पहले जलनिकासी, सड़क मरम्मत और संवेदनशील स्थानों की पहचान जैसे जरूरी काम नहीं किए गए, तो अगली बारिश में तस्वीर फिर वही हो सकती है।

बारिश नई होगी, लेकिन समस्या पुरानी!
अक्षर भारत लाइव की इस रिपोर्ट के साथ हम सवाल छोड़ रहे हैं—
क्या मानसून को हर साल आपदा बनने से रोकने के लिए शहरों की तैयारी पर्याप्त है?











