लखनऊ।अरविन्द श्रीवास्तव । उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उद्घाटन के महज 18 दिनों के भीतर एक्सप्रेस-वे के कई हिस्सों में सड़क धंसने और टूटने की शिकायतें सामने आने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने निर्माण एजेंसी PNC Infratech Limited के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे नॉन-परफॉर्मर घोषित कर दिया है। साथ ही टोल वसूली को भी फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में एक्सप्रेस-वे के एक हिस्से पर मरम्मत कार्य के दौरान बड़े-बड़े औद्योगिक पंखों (इंडस्ट्रियल फैन) से सड़क को सुखाने की कोशिश दिखाई दे रही है। इन दृश्यों के सामने आने के बाद परियोजना की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर लोगों में चर्चा तेज हो गई है।
18 दिन में 84 स्थानों पर मरम्मत की नौबत
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 4700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस 63 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेस-वे में उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद 84 स्थानों पर सड़क धंसने या क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें मिलीं। इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने मरम्मत कार्य शुरू कराया।

गडकरी का बयान फिर चर्चा में
13 जुलाई 2026 को एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि “उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय राजमार्ग अमेरिका के जैसे होंगे।” हालांकि, सड़क की मौजूदा स्थिति को लेकर उठे सवालों के बाद उनका यह बयान भी सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया जा रहा है।

निर्माण कंपनी पर विपक्ष के आरोप
इस मामले में विपक्ष ने भी सरकार को घेरा है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि एक्सप्रेस-वे का निर्माण करने वाली PNC Infratech Limited के मालिक प्रदीप कुमार जैन, भाजपा के राज्यसभा सांसद नवीन जैन के भाई हैं। विपक्ष का यह भी दावा है कि कंपनी पूर्व में झांसी-खजुराहो हाईवे परियोजना से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के मामले में सीबीआई जांच का सामना कर चुकी है।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग समय पर अपना पक्ष रखा गया है और किसी भी मामले में अंतिम न्यायिक निर्णय आना अभी शेष है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
मरम्मत के दौरान सड़क को बड़े-बड़े पंखों से सुखाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूजर्स इस पर सवाल उठा रहे हैं कि हजारों करोड़ रुपये की लागत से बने एक्सप्रेस-वे की ऐसी स्थिति आखिर क्यों बनी।
जवाबदेही पर उठ रहे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद निर्माण गुणवत्ता, परियोजना की निगरानी और सरकारी एजेंसियों की जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एक्सप्रेस-वे की तकनीकी जांच में क्या निष्कर्ष निकलते हैं और यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।











