लखनऊ। अरविन्द श्रीवास्तव। राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए पूरे घटनाक्रम की समय-रेखा सार्वजनिक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस मामले में पूरी कार्रवाई राम मंदिर ट्रस्ट की शिकायत के आधार पर और पूरी पारदर्शिता के साथ की है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, 12 जून को राम मंदिर ट्रस्ट ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर चंदा चोरी से जुड़े मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था। शिकायत मिलते ही सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि एसआईटी ने 15 जून से अपनी जांच शुरू की और प्रारंभिक स्तर पर साक्ष्य जुटाने के बाद 23 जून को अपनी पहली अंतरिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की और आधा दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच अभी समाप्त नहीं हुई है और एसआईटी पूरे मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से यह भी कहा कि अब तक की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में किसी भी साधु-संत की संलिप्तता सामने नहीं आई है।

मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद मामले को लेकर चल रही विभिन्न अटकलों और आरोप-प्रत्यारोप के बीच सरकार का पक्ष स्पष्ट रूप से सामने आया है। अब सभी की निगाहें एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि इस मामले में आगे और किन लोगों की भूमिका सामने आती है।

हालांकि, अंतिम जांच रिपोर्ट आने तक इस मामले में किसी भी नए निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियां लगातार साक्ष्य जुटाने और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच में जुटी हुई हैं।











